Saturday, February 18, 2012

रुख्ह जो पलटूं तो सारी बात ख़तम .....

रुख्ह जो पलटूं तो सारी बात ख़तम
आँखें उतना नहीं दुखेंगी तब
सवाल एह है कि उस चित्र से मुदुं कैसे
दिले दीवार में मढ़ा है जो

Friday, February 17, 2012

भला मैं बात अपनी क्या करूंगा ...

भला मैं बात अपनी क्या करूंगा
मुझे फुर्सत कहाँ है आंसुओं से
घनी बरसात में जो तर बतर हो
पूछना मेरी कहानी उस सुमन से

Saturday, May 23, 2009

Where to land ?

मेरी अनाकनेक रचनाएँ काव्य और लेख सभी कुछ वृहद रूप में यत्र तत्र एक खलिहान के रूप में बिखरी पड़ी हैं और एक ऊहापोह की इस्थिति बनी हुई है कि उन्हें किस प्रकार से एक क्र्मवद्ध रचनात्मक स्वरुप दिया जा सके। इस ब्लॉग के साथ समस्या यह है कि इस के मध्यम से संकलित कृत्यां सामान्य रूप से एक फाइल या फोल्डर की शकल में डाउनलोड नहीं हो सकती और उनका संकलन एक मुश्किल शकल अख्तियार कर लेता है। मैं अभी भी निराश नहीं हूँ और बराबर प्रयासरत रहना चाहता हूँ कि कोई समाधान निकल आए। ऐसा नहीं है कि कोई भी लेखन केवल स्वन्तासुखाए होता है बल्कि किसी भी लेखक या कवि कि यह स्वाभाविक रूचि होती है कि अन्य लोग भी उसका अवलोकन करें। ब्लॉग का पढ़ पाना तो केवल इन्टरनेट के माध्यम से ही सम्भव है जो सुविधा जन सामान्य को अभी भी न तो उपलब्ध है और न उसके लिए आवश्यक जागरूता है।

Saturday, September 22, 2007

समस्या और सार्थकता

एक कल्पना है और उस से भी अधिक सार्थकता की कठिनाई है । दोनो का मेल मिलाप अपने आप में एक भारी समस्या है । सब कुछ मिला जुला कर जीवन सरल नहीं लगता है । आवश्यकता होती है एक ऎसी विचारधारा की जो कोइ समाधान दे सके .

Thursday, September 20, 2007

Friday, July 27, 2007

एक प्रयास ।

एक प्रयास इस दिशा में कि हिन्दी में कुछ अलग से लिखा जा सके बिना किसी ब्योधान के बिना किसी बाधा के । देखना है कि अभिव्यक्ति का यह स्वरूप कितना सहायक सिद्ध हो सकता है ।