भला मैं बात अपनी क्या करूंगा
मुझे फुर्सत कहाँ है आंसुओं से
घनी बरसात में जो तर बतर हो
पूछना मेरी कहानी उस सुमन से
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Friday, February 17, 2012
Saturday, September 22, 2007
समस्या और सार्थकता
एक कल्पना है और उस से भी अधिक सार्थकता की कठिनाई है । दोनो का मेल मिलाप अपने आप में एक भारी समस्या है । सब कुछ मिला जुला कर जीवन सरल नहीं लगता है । आवश्यकता होती है एक ऎसी विचारधारा की जो कोइ समाधान दे सके .
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